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Wednesday, August 08, 2012

मैंने कहा फूलों से हँसो तो वो खिल-खिला के हँस दिये!! Laughing Flowers

प्रकृति से मेरा लगाव बढ़ता जा रहा है। पता नहीं क्यों लोग पेड़ों को काट कर काठ -कबाड़ से अपने घरों को भरते जा रहे हैं। पहाड़ों पर जाकर धर्म के नाम पर कचरा और गन्दगी को फैला कर आ जाते हैं और हमारे द्वारा फैलाई गन्दगी को जोडी अंडरहिल (Jodie Underhill) जैसे विदेशी आकर साफ़ करते हैं। हम जिन नदियों , पहाड़ों और धार्मिक स्थलों को पूज्य मानते हैं उन्ही को गन्दगी और कूड़े से भर देते हैं । 

हमारे आचार-विचार में शुचिता कब आएगी ये तो मुझे पता नहीं, पर स्व-परिवर्तन मैंने शुरू कर दिया है। पहाड़ों पर मैं जाता हूँ, लेकिन वहां कुछ भी छोड़ कर नहीं आता हूँ; सिवाय अपने पैरों के निशान के। कोई बाहर से नहीं आएगा गन्दगी साफ़ करने। 

मैं ज्यादा नहीं लेकिन थोडा सा दूसरों द्वारा फैलाया कचरा अपने साथ जरूर नीचे लाता हूँ। अगर सभी लोग ऐसा करें तो हम स्वच्छ पर्यावरण अपने आने वाली पीढ़ी को सौंप कर जायेंगे। क्या आप नहीं चाहते की आप के बच्चे भी इस सुन्दरता को निहारें और देखें ??









पत्तियों पर पानी की बूंदों का ये दुर्लभ और मेरे जीवन का अब तक का सबसे बेहतरीन फोटो , जो भाई विपिन के सहयोग से संभव हो सका !!





है न!! प्रकृति का लाजवाब नमूना


इस यात्रा में इनको बहुत खाया मैंने !!










अद्भुत








भक्त कण-कण में भगवान को देखते हैं , इस फूल में भी भक्तों को गणेश जी दिखाई दिए !!




इस पोस्ट को पढ़ने वालों से निवेदन है कि, प्रकृति और पर्यायवरण को बचाने का संकल्प लें ! आज ही लें बाद में तो बहुत देर हो जाएगी !!